Vaidik Jurisprudence & Deconstruction

Manusmriti (मनुस्मृति: मूल दर्शन)


मूल दर्शन, समतामूलक न्याय एवं प्रक्षेप-मुक्ति। सहस्रों वर्षों से दबाए गए विश्व के सबसे उदात्त समतावादी न्यायशास्त्र का प्रामाणिक शोध।

Manusmriti (मनुस्मृति: मूल दर्शन) Book Cover

मनुस्मृति: मूल दर्शन, समतामूलक न्याय एवं प्रक्षेप-मुक्ति

विगत दो शताब्दियों के वैचारिक षड्यंत्रों का प्रामाणिक भंडाफोड़ एवं विशुद्ध वैदिक न्यायशास्त्र

Vedic Jurisprudence, History & Legal Philosophy

क्या मनुस्मृति सचमुच जन्मगत जातिवाद और स्त्री-दमन का ग्रंथ है, अथवा यह सहस्रों वर्षों से दबाया गया विश्व का सबसे उदात्त समतावादी न्यायशास्त्र है? विगत दो शताब्दियों से विशुद्ध मनुस्मृति को एक सुनियोजित वैचारिक रणक्षेत्र बना दिया गया। एक ओर औपनिवेशिक प्राच्यविदों (Warren Hastings, William Jones) और मार्क्सवादी इतिहासकारों ने इसके विकृत अनुवादों के आधार पर संपूर्ण भारतीय संस्कृति को लांछित किया, तो दूसरी ओर रूढ़िवादियों ने इसमें प्रक्षिप्त (interpolated) श्लोक जोड़कर अपने स्वार्थ साधे।

सुल्तान सिंह द्वारा रचित यह ग्रंथ मनुस्मृति के मूल वैदिक सूत्रों, आंतरिक व्याकरण और यास्क के निरुक्त के आधार पर प्रक्षेपों को अलग कर उसके वास्तविक, समतामूलक और वैज्ञानिक स्वरूप को उजागर करता है।

"विशुद्ध मनुस्मृति किसी जन्मगत जातिवाद का समर्थन नहीं करती, बल्कि गुण और कर्म पर आधारित योग्यता एवं दायित्व-आधारित कठोर दंड-विधान की स्थापना करती है।"

Key Insights & Themes:

  • ✓औपनिवेशिक छल का पर्दाफाश (1757-1901): वॉरेन हेस्टिंग्स की धारा 23, विवादार्णवसेतु और मैकाले द्वारा वैदिक न्याय व्यवस्था को विकृत करने का ऐतिहासिक विश्लेषण।
  • ✓दायित्व-आधारित आनुपातिक न्याय प्रणाली (श्लोक 8.337-338): साधारण नागरिक की तुलना में राजा, विद्वान और उच्च पदस्थ अधिकारी के अपराध पर कई गुना अधिक कठोर दंड का प्राविधान।
  • ✓गुण-कर्म पर आधारित गतिशील वर्ण-व्यवस्था (श्लोक 10.65): जन्म आधारित जातिवाद का समूल विखंडन; शूद्र भी अपने ज्ञान और तप से ब्राह्मण बन सकता है और ब्राह्मण आचरणहीन होने पर शूद्र।
  • ✓नारी-गरिमा एवं 'स्त्रीधन' का संप्रभु अधिकार: 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः' (3.56) के वास्तविक कानूनी और आध्यात्मिक अधिकारों की प्रामाणिक विवेचना।

Author: Sultan Singh

Language: Hindi (हिन्दी)

Genre: Vedic Jurisprudence & Legal Philosophy

ASIN: B0HG8JFLB1

Format: Kindle E-Book / High-Res Printable Watermarked PDF

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